रानमेवा प्रकाशित काव्यसंग्रह

प्रकाशन दिनांक शीर्षक लेखक वाचने
23-06-2011 भावात्म काव्यात्मकतेचा 'गोडवा’ प्रा. मधुकर पाटील 1,071
23-06-2011 'सकाळ' 'सप्तरंग पुरवणीत' 'रानमेवा' ची दखल संपादक 1,448
23-06-2011 इतके उत्तम भाष्य फ़क्त श्रेष्ठ कवीच करू शकतो वामन देशपांडे 908
23-06-2011 काळ्या मातीचा गंध शब्दाशब्दांतून जाणवतो. डॉ.श्रीकृष्ण राऊत 983
23-06-2011 सर्वच कविता वाचनीय मुकुंद कर्णिक 1,004
23-06-2011 विचार- सरणीचं अचूक दर्शन छाया देसाई 834
23-06-2011 चाकोरीबाहेरचं लिहायचा प्रयास गिरीश कुलकर्णी 963
23-06-2011 लिखाणामधे खूप विविधता स्वप्नाली 919
23-06-2011 सडेतोड लेखणीतून वास्तवचित्र डॉ भारत करडक 873
23-06-2011 लिखाण अतिशय प्रामाणिक जयश्री अंबासकर 968
23-06-2011 अभ्यासपूर्ण आणि अस्सल काव्य अनिलमतिवडे 862
23-06-2011 अनुभवांची शिदोरी आणि सृजनशीलतेची समृद्धी अलका काटदरे 863
23-06-2011 एक “अनुभवसिद्ध रानमेवा" प्रकाश महाराज वाघ 812
22-06-2011 माय मराठीचे श्लोक...!! गंगाधर मुटे 924
22-06-2011 बळीराजाचे ध्यान ....!! गंगाधर मुटे 1,844
22-06-2011 नाते ऋणानुबंधाचे.. गंगाधर मुटे 781
22-06-2011 हवी कशाला मग तलवार ? गंगाधर मुटे 669
22-06-2011 रे जाग यौवना रे....!! गंगाधर मुटे 939
22-06-2011 शेतकरी मर्दानी...! गंगाधर मुटे 1,222
22-06-2011 बायोडाटा..!! गंगाधर मुटे 783

पाने