बरं झाल देवा बाप्पा...!!

लेखनप्रकार : 
चित्रफ़ित Vdo
लेखनविभाग: 
गीतरचना

(१९८५ मध्ये मी लिहिलेली माझी पहिली कविता.)

बरं झाल देवा बाप्पा...!!

सरकारच्या धोरणापायी छक्केपंजे आटले
बरं झालं देवा बाप्पा, शरद जोशी भेटले ....॥धृ.॥

कर्ज ठेवून आजा मेला, कशी ही कसोटी
कर्जफ़ेडीपायी जगला बाप अर्धपोटी
तरी नाही ऐसेकैसे कर्जपाणी फ़िटले ....॥१॥

कधी चालुनिया येते कहर अस्मानी
विपरीत शेतीधोरण कधी सुलतानी
कमी दाम देवुनिया, शेतीमाल लुटले ....॥२॥

इंडियाचे राज्य आले, इंग्रजाचे गेले
शोषणाने शेतकरी खंगुनिया मेले
पोशिंद्याच्या मुक्तीसाठी रान सारे पेटले ....॥३॥

गंगाधर मुटे
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(पूर्वप्रकाशित- शेतकरी संघटक "ग्रामीण अनुभूती विशेषांक"१९८५)
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(रानमेवा काव्यसंग्रह - प्रकाशन दि. १०.११.२०१०)

प्रतिक्रिया

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विनिता's picture

Congrats

Raosaheb Jadhav's picture

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रावसाहेब जाधव (चांदवड)

गंगाधर मुटे's picture

विनिताजी, रावसाहेब जाधव सर,
धन्यवाद! RamramRamram

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गंगाधर मुटे's picture

बरं झाल देवा बाप्पा

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Nilesh's picture

Congrats