समीक्षण

*शेतमालाचा उत्पादनखर्च भरून निघेल एवढा भाव मिळवणे हा शेतकर्‍यांचा अधिकार आहे*
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प्रकाशन दिनांक शिर्षकsort descending लेखक वाचने प्रतिसाद
23-06-2011 अभ्यासपूर्ण आणि अस्सल काव्य अनिलमतिवडे 859
10-03-2014 "माझी गझल निराळी" प्रस्तावना - श्री सुधाकर कदम संपादक 885
25-07-2012 ''वांगे अमर रहे’ प्रकाशन समारंभ गंगाधर मुटे 4,345 2
27-10-2012 'ब्लॉग माझा-२०१२' स्पर्धा - विजेता रानमोगरा गंगाधर मुटे 1,100 2
23-06-2011 'सकाळ' 'सप्तरंग पुरवणीत' 'रानमेवा' ची दखल संपादक 1,445
23-06-2011 अनुभवांची शिदोरी आणि सृजनशीलतेची समृद्धी अलका काटदरे 861
30-11-2014 अविस्मरणीय दिवस : ३०/११/२०१४ गंगाधर मुटे 461
23-06-2011 इतके उत्तम भाष्य फ़क्त श्रेष्ठ कवीच करू शकतो वामन देशपांडे 906
23-06-2011 एक “अनुभवसिद्ध रानमेवा" प्रकाश महाराज वाघ 811
23-06-2011 काळ्या मातीचा गंध शब्दाशब्दांतून जाणवतो. डॉ.श्रीकृष्ण राऊत 982
23-06-2011 गंगाधर मुटेंचा काव्यमेवा - कवितेचा परिचय बेफिकीर 1,371 3
09-03-2014 गझलविश्वाची परिभाषा बदलणारा गझलसंग्रह - श्री राज पठाण संपादक 792
23-06-2011 चाकोरीबाहेरचं लिहायचा प्रयास गिरीश कुलकर्णी 961
09-03-2014 तोंडी, लेखी व प्रयोगशाळेतही मेरीटचे गुण - श्री तुळशीराम बोबडे संपादक 614
23-02-2013 नागपुरी तडका - ई पुस्तक गंगाधर मुटे 34,321 30
10-03-2014 परिघाबाहेरची गझल - श्री किमंतु ओंबळे संपादक 742
09-03-2014 परीक्षकांचीच परीक्षा घेणारा गझलसंग्रह - श्री. श्याम पवार संपादक 787
23-06-2011 भावात्म काव्यात्मकतेचा 'गोडवा’ प्रा. मधुकर पाटील 1,068
27-07-2011 भुलाबाईची गाणी : ग्रामीण संस्कृतीचे वास्तवदर्शन गंगाधर मुटे 1,548 1
13-07-2011 भोंडला, हादगा आणि भुलाबाईची गाणी : महिलांच्या व्यथा गंगाधर मुटे 7,004 13

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