समीक्षण

*शेतमालाचा उत्पादनखर्च भरून निघेल एवढा भाव मिळवणे हा शेतकर्‍यांचा अधिकार आहे*
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प्रकाशन दिनांक शिर्षक लेखक वाचने प्रतिसादsort descending
23-06-2011 एक “अनुभवसिद्ध रानमेवा" प्रकाश महाराज वाघ 811
23-06-2011 अनुभवांची शिदोरी आणि सृजनशीलतेची समृद्धी अलका काटदरे 861
23-06-2011 अभ्यासपूर्ण आणि अस्सल काव्य अनिलमतिवडे 859
23-06-2011 लिखाण अतिशय प्रामाणिक जयश्री अंबासकर 967
23-06-2011 सडेतोड लेखणीतून वास्तवचित्र डॉ भारत करडक 872
23-06-2011 लिखाणामधे खूप विविधता स्वप्नाली 917
23-06-2011 चाकोरीबाहेरचं लिहायचा प्रयास गिरीश कुलकर्णी 961
23-06-2011 विचार- सरणीचं अचूक दर्शन छाया देसाई 832
23-06-2011 सर्वच कविता वाचनीय मुकुंद कर्णिक 1,002
23-06-2011 काळ्या मातीचा गंध शब्दाशब्दांतून जाणवतो. डॉ.श्रीकृष्ण राऊत 982
23-06-2011 इतके उत्तम भाष्य फ़क्त श्रेष्ठ कवीच करू शकतो वामन देशपांडे 906
23-06-2011 'सकाळ' 'सप्तरंग पुरवणीत' 'रानमेवा' ची दखल संपादक 1,445
23-06-2011 भावात्म काव्यात्मकतेचा 'गोडवा’ प्रा. मधुकर पाटील 1,068
23-06-2011 रानमेवा प्रस्तावना - मा. शरद जोशी संपादक 3,104
24-06-2011 रानमेवाची दखल संपादक 1,132
30-05-2011 स्टार माझा स्पर्धा विजेता - माझा ब्लॉग रानमोगरा गंगाधर मुटे 1,815
16-04-2013 विद्यापिठाच्या Thesis मध्ये माझी वाङ्मयशेती गंगाधर मुटे 847
09-03-2014 परीक्षकांचीच परीक्षा घेणारा गझलसंग्रह - श्री. श्याम पवार संपादक 787
09-03-2014 ’माझी गझल निराळी’ - अभिप्राय : डॉ. अभय बंग संपादक 564
09-03-2014 ’माझी गझल निराळी’ - अभिप्राय : डॉ.विकास आमटे संपादक 564

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